web directories kya hota hai

Free Web Directories Kya Hota Hai Aur Iska Kya Khatra Hai

web directories kya hota hai

अक्सर हम सभी ब्लॉग के ट्रैफिक को लेकर परेशान रहते है और कई बार बढ़िया आर्टिकल पब्लिश करते रहने के बावजूद इसमें न के बराबर सुधार होता है।

ट्रैफिक एक ऐसी समस्या है, जो नए और पुराने ब्लॉग/वेबसाईट के साथ होना आम बात है।

इस तरह के समस्या का कारण ज्यादातर पॉलिसी वॉयलेंस होता है।

खैर इन सब बातों को छोड़कर आगे बढ़ते है।

आज का टॉपिक है web directory और आज के इस पोस्ट में जान पाएंगे कि यह क्या होता है और कैसे काम करता है।

What is Web Directories

वेब डिरेक्टरीज एक साइट होता है जैसा कि मेरा ब्लॉग (RichBlog) या कोई वेबसाइट, जिसमें दूसरे साइटों का ऑनलाईन लिस्ट बना होता है।

इस लिस्ट को मैन्युअल रूप से तैयार किया जाता है।

According to WikiPedia

A web directory or link directory is an online list or catalog of websites.

इस तरह के लिस्ट को दो तरह से तैयार किया जाता है।

#1 पहले तरीके में खुद वेब डायरेक्टरी एडमिन बहुत से साइट को इंटरनेट से खोजकर इसका लिस्ट बनाते है।

इसमें ज्यादातर उस साइट को शामिल किया जाता है, जिसका गूगल पेज रैंक ज्यादा होता है और सर्च पेज में आसानी से रैंक करता है।

इसलिए इसे आसानी से खोज कर इसका लिस्ट कैटलॉग तैयार कर लिया जाता है।

#2 पर दूसरे तरीके में साइट ऑनर खुद से अपने ब्लॉग या वेबसाइट को डायरेक्टरी में सबमिट करते है।

इस तरह के तरीकों में नए नए लॉन्च साइट को शामिल किया जाता है।

इससे पहले कि ऊपर दिए गए बातों को पढ़कर अपना ब्लॉग सबमिट करने पहुंच जाए, उसके पहले कुछ बातों पर आपको ध्यान देना होगा।

Facts About Web Directories

दरअसल आपको यह बात पता होना चाहिए कि किसी भी ब्लॉग को Serp’s में रैंक करने के लिए बैकलिंक का जरूरत होता है।

और इस तरह का बैकलिंक जल्दी बना पाना आसान नहीं होता है। लेकिन वेब डायरेक्टरी के जरिए यह संभव है।

पर इस तरह के टैक्टिक्स से बना बैकलिंक आपको फायदे के जगह नुकसान पहुंचा सकता है, पर समझदारी से इससे बचा जा सकता है।

कैसे?

गूगल गाइडलाइन के अनुसार बैकलिंक हमेशा high quality और relevant site से बना होना चाहिए, पर ज्यादातर डायरेक्टरी इस मुआमले में फिसड्डी साबित होता है।

दरअसल इस तरह के वेब डायरेक्टरी का निर्माण नए वेबसाईट को गूगल सर्च पेज में जल्दी से रैंक करवाना और इस ट्रैफिक से ज्यादा कमाई करना होता है।

और यही वजह है कि इस तरह का साइट कोई इंफॉर्मेटिक्स आर्टिकल पब्लिश नहीं करता है, बस साइट का लिस्ट तैयार करने में लगा रहता है।

और गूगल जैसे सर्च इंजन का मेन गोल यही होता है कि वह अपने सर्चर को जितना हो सके, उतना सटीक जानकारी उपलब्ध करता है।

पर किसी तरह का पोस्ट होने होने के वजह से वेब डायरेक्टरी इस मामले में खड़ा नहीं उतरता है और गूगल इस तरह के साइट को बैन कर देता है और इसके वजह से इसका रैंकिंग destroy हो जाता है।

अक्सर ऐसा देखा गया है कि वेब डायरेक्टरी जैसे साइट शुरू में अच्छा ट्रैफिक हासिल करते है, क्योंकि गूगल के एल्गोरिथम अभी तक इस तरह के साइट को डिटेक्ट नहीं कर पाते है।

पर मैन्युअल चैकिंग में साइट का बैंड बज जाता है।

Importance of Directories Site’s

ऊपर के बातों को पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि इस पोस्ट को पढ़कर फिर क्या फायदा।

लेकिन फायदा है अगर समझदारी से इस्तेमाल किया जाए तो?

मेरे हिसाब से इस तरह के साइट का सबसे अच्छा इस्तेमाल ब्लॉग ट्रैफिक बढ़ाने के लिए होना चाहिए।

लेकिन इसके लिए कुछ बातों को ध्यान रखना चाहिए:

  1. वेबसाईट को गूगल के द्वारा दण्डित नहीं किया गया हो।
  2. इस साइट का गूगल पेज रेंक, डोमेन ऑथोरिटी ज्यादा होना चाहिए।

Submit Link in Web Directories

फाइनली आप खुद के ब्लॉग को सबमिट करने जा रहे, पहले वेबसाइट के स्टेट्स को जानने का प्रयास करते है।

जिस डायरेक्टरी साइट को गूगल के द्वारा दण्डित किया गया होगा, तो उसका रैंकिंग खत्म हो गया होगा। किसी भी साइट का रैंक जानने के लिए एलेक्सा साइट का इस्तेमाल किया जाता है।

#1 सबसे पहले एलेक्सा साइट को विजिट करे।


इसके बाद इस टेक्स्ट बॉक्स में अपना डोमेन नेम डाले। जैसे यहां पर मैंने submission4you.com डाला है, उसके जगह आप अपना डोमेन डाल सकते है।

#2 फिर Find करने के बाद रिजल्ट

लेकिन अगर रैंक कर रहा होता तो, रिजल्ट इस प्रकार दिखाता

अगर साइट का रैंकिंग दिखा रहा है, तो जरूरी नहीं कि वह दण्डित नहीं हुआ है।

जैसे मेरा साइट RichBlog.tech का एलेक्सा रैंक 4,105,328 है, जो ऊपर वाले इमेज में देख सकते है।

जबकि मेरा ब्लॉग बिल्कुल नया है। इसे जब CheckPageRank वेबसाईट से चेक करेंगे, तो इसका डोमेन ऑथोरिटी 0, पेज ऑथोरिटी 1 और गूगल पेज रैंक भी 0 शो करेगा।

पर HaaBaa साइट का डोमेन ऑथोरिटी 25, पेज ऑथोरिटी 37, गूगल पेज रैंक 3 और यहां तक कि इस साइट का पेज क्वालिटी भी स्ट्रॉन्ग दिखा रहा है, पर इसका रैंकिंग 7,709,097 ही दिखा रहा है।

पर अगर साइट को दण्डित नहीं किया गया होता तो

यहां रैंक IndiBlogHub का दिखा रहा है, जिसका सीधा मतलब है कि इसे गूगल के द्वारा दण्डित नहीं किया गया है।

लेकिन इस साइट पर मैंने एक बात को नोटिस किया है कि इसमें आप जो भी ब्लॉग सबमिट करते है, उसके सभी पोस्ट का 150-200 वर्ड्स शो करता है और इस पोस्ट को पूरा पढ़ने के लिए एक्चुअल साइट को विजिट करना पड़ता है।

खैर यह तरीका मैंने बताया है Dead & Alive साइट को पहचानने का और अगर आप भी किसी वेब डायरेक्टरी में साइट सबमिशन के लिए जा रहे है, तो इस टैक्टिक्स का इस्तेमाल कर सकते है।

किसी भी साइट में लिंक या इंडिविजुअल आर्टिकल को तीन तरह से सबमिट किया जा सकता है।

#1 Free Submission

जब किसी लिंक या आर्टिकल को फ्री प्लान के अन्तर्गत सबमिट किया जाता है, तो इसमें टाइम लगता है क्योंकि इसे मैनुअली रिव्यू करने के बाद ही Approved किया जाता है।

इसमें एक महीने से लेकर तीन महीने तक का टाइम लग सकता है। इस तरह का लिंक सुरक्षित होता है और आपके ब्लॉग को किसी तरह का क्षति नहीं पहुंचाता है।

#2 Reciprocal Submit

इसमें आपका सबमिट किया गया पोस्ट का साइट जल्दी सबमिट होता है, पर एक कंडीशन है अप्रूवल के लिए।

जिस वेब डायरेक्टरी में अपने साइट को सबमिट कर रहे है, वह सबमिट करने के बाद एक Html Code आपको प्रोवाइड कराते है, जो दरअसल एक widget होता है।

इस विजेट को अपने साइट में जोड़ना होता है, इसके बाद ही आपका सबमिट किया साइट approved किया जाता है।

इस तरह का सबमिशन गूगल लिंक स्कीम गाइडलाइन के बिल्कुल खिलाफ है और यह आपके साइट को डैमेज कर सकता है।

#3 Paid Submit

इसमें आपके आर्टिकल या साइट को इंस्टैंट approved किया जाता है, पर इसके लिए आपको कुछ निर्धारित पेमेंट देना होता है।

इस तरह का टैक्टिक्स किसी भी साइट के लिए बेहद खतरनाक है क्योंकि आप बैकलिंक नहीं खरीद सकते है।

इसमें होता क्या है आपने जो भी साइट को सबमिट किया है, वह वेब डायरेक्टरी एडमिन सभी कैटेगरी में लिस्टेड कर देता है और इसी वजह से आपका ब्लॉग स्पैमी लिंक के वजह से रैंक आउट होने का डर बना रहता है।

लेकिन सही डायरेक्ट्री में भी सही मात्रा में लिंक सबमिट करना चाहिए।

जब आप किसी भी डायरेक्टरी में साइट को सबमिट किया जाता है, तो उससे जो लिंक मिलता है, वह no-follow लिंक रहता है, पर जब आप किसी ब्लॉग में गेस्ट पोस्ट करते है या वह खुद से अपने किसी पोस्ट में लिंक देता है, तो वह do-follow लिंक होता है।

No-Follow से Citation Flow बढ़ता है और Do-Follow से Trust Flow बढ़ता है।

Trust Flow/Citation Flow = Trust Ratio

जैसे अगर आपका TF 10 है और CF 50 है, तो ट्रस्ट ratio होगा

TF/CF=TM | 10/50=0.2

लेकिन इस मीट्रिक को बनाने वालों का कहना है टीएफ और सीएफ दोनों का वैल्यू एक होना चाहिए, लेकिन इसका ratio ½ सही है।

According to OnCrawl

The best ratio seems to be 1. Average Trust to Citation Flow ratio should be 0.50.

Conclusions

आपको लगता होगा कि मैंने किसी वेब डायरेक्ट्री साइट के बारे में नहीं बताया है, तो इसका सबसे बड़ा कारण है कि वेब डायरेक्टरी साइट का कोई भरोसा नहीं है कि कब वह गूगल गाइडलाइन पॉलिसी का हनन करे और वह उस डायरेक्टरी साइट को बैन कर दे।

इसलिए अगर आपको किसी वेब डायरेक्टरी साइट में लिंक सबमिट करना है, तो सीधा गूगल सर्च में जाकर Free Web Directorie सर्च कर सकते है और फिर जिसमें भी सबमिट करना है, उसका स्टेट्स मेरे द्वारा बताए गए टैक्टिक्स से पता कर सकते है।

फिर इसके बाद सबमिट भी करना चाहे, तो कर सकते है।

आज के लिए बस इतना ही अगर आज का यह पोस्ट आपको पसंद आए, तो मुझे कॉमेंट करके जरुर बताए और हो सके तो इस पोस्ट को अपने सोशल मीडिया साइट्स में शेयर भी कर सकते है।

और अब अंत में इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद।

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